अध्याय 7

मैंने अपना पैक किया हुआ सामान उठाया और स्मिथ हवेली का दरवाज़ा बहुत धीरे से धकेलकर खोल दिया—तैयार थी कि चुपचाप निकल जाऊँ, बिना किसी की नज़र में आए, बिना उन बॉडीगार्ड्स के रोके जिन्हें जेम्स ने तैनात कर रखा था।

मैं बस मुख्य दरवाज़े तक पहुँचने ही वाली थी कि जेम्स की कार आँगन में धीरे-धीरे आकर रुकी। वह और अमेलिया साथ-साथ चलते हुए स्टडी की ओर चले गए।

अंदर से आती बातचीत मेरे कानों में पड़ी और बिजली की तरह आकर मुझ पर गिरी—मेरे कदम वहीं जड़ हो गए।

स्टडी का दरवाज़ा पूरा बंद नहीं था, बस एक छोटा-सा अंतर रह गया था।

मैं अनायास ही उनके पीछे खिंचती चली गई।

उस झिर्री से मैंने देखा—अमेलिया और जेम्स अंदर खड़े थे।

कमरे की चुप्पी तोड़ते हुए अमेलिया की आवाज़ में सतर्क, टटोलने वाला-सा लहजा था।

“जेम्स, अगर—मेरा मतलब, अगर…” उसकी आवाज़ हिचकिचाहट से भरी थी। “सोफिया सच में प्रेग्नेंट हो? आज तुमने देखा न, उसे कितनी ज़ोर की उल्टियाँ हो रही थीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि…”

वह वाक्य पूरा नहीं कर पाई, मगर उसके शब्द किसी अदृश्य हाथ की तरह मेरे दिल को कसकर पकड़ गए।

मैंने साँस रोक ली। जैसे मेरे शरीर का सारा ख़ून कानों तक चढ़ आया हो। मैं घबराई हुई जेम्स के जवाब का इंतज़ार करती रही।

उस पल में समय जैसे बेइंतिहा लंबा खिंच गया।

फिर मैंने वह जवाब सुना जिसे मैं ज़िंदगी भर कभी नहीं भूल पाऊँगी।

जेम्स हमेशा की तरह ठंडा था—और उसकी आवाज़ में गले की गहराई से उठती तिरस्कार की धार मिली हुई थी।

वह जैसे नाक से हल्की-सी हँसी निकालकर बोला, उसका लहजा इतना बेपरवाह था मानो कोई ऐसी बात कर रहा हो जिसका उससे कोई लेना-देना ही नहीं।

“नामुमकिन।” उसने बिना एक पल की झिझक के, सख़्ती से नकार दिया।

“मैंने हर बार सावधानी बरती है। वो प्रेग्नेंट कैसे हो सकती है?”

“लेकिन…”

“कोई लेकिन-वेलकिन नहीं।” जेम्स ने उसे काट दिया—उसकी आवाज़ में अहंकारी, सब कुछ जानने वाली-सी हँसी थी। “मान भी लो, और मैं सिर्फ मानने की बात कर रहा हूँ, कि वो सच में मेरे बच्चे की माँ बनने वाली होती।”

वह रुका। उसके शब्द ज़हरीली बर्फ़ की सुइयों की तरह उस दरवाज़े की झिर्री से होकर निकले—सीधे मेरे कानों में धँसते हुए मेरे दिल में चुभ गए।

“उस जैसी औरत, जिसने मेरे बिस्तर तक पहुँचने के लिए हर गंदी चाल चली… वो बच्चे को भी बस एक हथियार बनाएगी—मुझे बाँधने के लिए, और स्मिथ परिवार को ब्लैकमेल करने के लिए।”

उसने मुझे ज़रा भी संभलने का मौका नहीं दिया, आगे बोलता गया, “मैं ऐसी चालाक औरत से पैदा हुए बच्चे को कभी नहीं अपनाऊँगा, उसे चाहना तो दूर की बात है।”

ये हल्के-से शब्द सबसे तेज़ गिलोटिन की धार की तरह गिरे।

और बच्चे के नाम पर इस परिवार को किसी तरह जोड़े रखने की मेरी आख़िरी, कमज़ोर-सी उम्मीद की डोर भी पूरी तरह कट गई।

तो उसकी नज़रों में मेरी हैसियत इतनी थी।

जिस बच्चे को मैं खज़ाने की तरह सँजो रही थी, जिसे बचाने के लिए मैं बेबस होकर भी लड़ रही थी—उसकी नज़र में वह बस एक “हथियार” था, जिसे एक “चालबाज़ औरत” उसके खिलाफ इस्तेमाल करेगी।

एक “गलती”, जिसकी उसे परवाह तक नहीं—जिसे वह अपना भी नहीं मानेगा।

मैंने सोचा था, उस रात अगर उसने मुझे गलत समझ भी लिया हो, तो दो साल की शादी के बाद वह मेरी सच्चाई देख लेगा। मगर वह तो शुरू से ही मेरी अपनी बनाई हुई उम्मीद थी।

मेरा दिल पल भर में जैसे खोखला हो गया, और फिर उसमें ठंडी, टूटी हुई काँच की किरचें भर दी गईं—हर साँस के साथ तीखा दर्द उठता रहा।

आँसू उमड़ पड़े। दुख और बेबसी गले में ऐसे अटक गए कि साँस घुटने लगी।

मैंने कितनी भोलेपन से सोच लिया था कि प्यार न सही, कम से कम अपने बच्चे को नाम भर का ही सही, एक पूरा घर दे दूँगी—ताकि उसे मेरी तरह अनाथालय में दूसरे बच्चों को उनके प्यार करने वाले माँ-बाप के साथ देखकर जलना न पड़े।

लेकिन अब मेरी नींद खुल गई थी।

मैं गलत थी—बहुत ज़्यादा गलत!

जिस बच्चे को चाहा ही न जाए, जिसे उसके पिता का प्यार न मिले, बल्कि जिसे उसका पिता नफरत करे, ठुकराए—वह अगर एक ठंडे, टूटे हुए घर में बड़ा होगा, तो उसकी किस्मत मेरी अनाथालय वाली ज़िंदगी से भी ज़्यादा बेबस और दुखद होगी।

‘जेम्स, तुम मेरे बच्चे के पिता कहलाने के लायक नहीं हो।’ मैंने मन ही मन कहा।

एक अभूतपूर्व ठंडक और दृढ़ निश्चय बर्फ़ीली लहर की तरह मेरे पूरे शरीर में दौड़ गया, जिसने आँसुओं और कमजोरी—दोनों को जैसे जमा दिया।

मैं बिना भीतर किसी को भनक लगे, उस स्टडी के दरवाज़े से—जो मुझे जहन्नुम के दरवाज़े जैसा लग रहा था—चुपचाप पीछे हट गई।

दूसरी मंज़िल की छत पर पहुँचते ही रात की ठंडी हवा मेरे जलते गालों को छूकर गुज़री, और मेरा दिमाग़ अजीब तरह से साफ़ हो गया।

मैंने फोन निकाला। स्क्रीन की रोशनी मेरे पीले, मगर हद दर्जे के दृढ़ चेहरे पर पड़ रही थी।

उससे शादी करने के लिए मैंने जो-जो छोड़ दिया था, वह सब अब पहले से भी बड़ा मज़ाक लग रहा था।

शायद उसे पता भी नहीं—और वो मान भी नहीं पाएगा—कि मैं उसकी कोई सजावट नहीं हूँ, न ही किसी कोने में रखी बेकार फूलदान।

किशोरावस्था में ही मैं देश की सबसे बेहतरीन कंप्यूटर साइंस एसोसिएशन से जुड़ चुकी थी। कंप्यूटरों में मेरी दिलचस्पी, कभी उससे मेरे प्यार से कम नहीं थी।

मेरी ठंडी उँगलियाँ स्क्रीन पर फिसलीं, और मैं उस नंबर को ढूँढ़ने लगी जिसे लगभग भूल ही गई थी—एंड्रू एंडरसन।

एंड्रू मेरा सीनियर था, और यूनिवर्सिटी के दिनों में वही मुझे एलीट हैकर टीम ‘शैडो सर्किट स्टूडियो’ तक ले गया था।

तब इंडिगो चाहती थी कि मैं उसके साथ ज़्यादा समय बिताऊँ, और मैं भी जेम्स की “अच्छी पत्नी” बनने की कोशिश में, कुछ समय के लिए वहाँ से अलग हो गई थी।

अब, मेरे गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए, और स्मिथ परिवार से निकलने के लिए, मुझे पहले से तैयारी करनी होगी—ताकि मैं और मेरा बच्चा उसके बिना भी ठीक से जी सकें।

दो रिंग में ही फोन उठ गया, और एंड्रू की आवाज़ आई—हमेशा की तरह गर्मजोशी और फिक्र से भरी।

“सोफिया।”

यूनिवर्सिटी की यादें एक साथ उमड़ पड़ीं, और मेरे होंठों के कोने अनायास उठ गए।

शादी के इन दो सालों की तुलना में, यूनिवर्सिटी के वो चार साल मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे चार साल थे।

तब मैं दिन भर ठंडे, खाली कमरे में बैठकर रोती नहीं रहती थी, और न ही मुझे आधी रात को घसीटकर उठाया जाता था—बस इसलिए कि किसी की वासना की भड़ास निकालने का सामान बना दिया जाए, बिना किसी नरमी, बिना किसी स्नेह के।

तब मेरी दुनिया में बस कंप्यूटर थे—गरम धूप की तरह।

एंड्रू का वही जाना-पहचाना, सच्चा अभिवादन फिर सुनकर—और अभी-अभी जेम्स के बर्फ़ जैसे शब्दों की तुलना में—मेरी नाक में चुभन हुई, मगर मैंने उसे दबा लिया।

मेरी आवाज़ बेहद शांत थी—इतनी शांत कि उसमें लहर भी नहीं—पर उसमें पीछे न देखने की जलती हुई दृढ़ता थी।

“एंड्रू।” मैंने खुद को सँभालने के लिए गहरी साँस ली, फिर बोली, “मैंने वापस आने का फैसला कर लिया है।”

“क्या शैडो सर्किट स्टूडियो को अभी भी मेरी ज़रूरत है?”

दूसरी तरफ़ एंड्रू जैसे एक पल को चौंक गया, फिर उसकी आवाज़ में बिना छिपाए खुशी और साथ देने का भरोसा भर गया। “बिलकुल, हमें तुम्हारी ज़रूरत है! सोफिया, तुम्हारी जगह हमेशा खाली ही रही है। हम सब तुम्हारे लौटने का इंतज़ार कर रहे थे।”

“कल।” मैंने फैसला सुनाते हुए कहा। मेरी नज़र दूर शहर की नीयन लाइट्स पर टिक गई—मेरी आँखें ठंडी और पैनी थीं।

“लेकिन उससे पहले, मुझे तुमसे एक काम में मदद चाहिए।”

“बताओ।”

“मेरे लिए तलाक़ का एग्रीमेंट ड्राफ्ट करवा दो।”

उसका सबसे अच्छा दोस्त देश का नामी टॉप वकील था—कम उम्र में ही मशहूर। जेम्स से सच में छुटकारा दिला सके, तो ऐसे ही वकील की मदद से।

एंड्रू को कोई हैरानी नहीं हुई; बस उसकी आवाज़ में हल्की-सी चिंता घुल गई। “कोई दिक्कत नहीं।”

फोन रखकर मैंने उसे कसकर थाम लिया, जैसे उसी से ताकत खींच रही हूँ।

‘जेम्स, जिस बच्चे को तुम नहीं चाहते, उसे मैं चाहती हूँ। जिन खानदान और काबिलियत को तुम तुच्छ समझते हो, वही मेरी ज़िंदगी की नींव बनेंगी। जिस बेतुकी शादी को तुमने अपने कंट्रोल में रखा—उसे अब पूरी तरह खत्म करने का वक्त आ गया है। मेरा भविष्य अब मेरे अपने हाथों में है।’ मैंने खुद से कहा।

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